सूचनार्थ

नमस्ते जी, “संस्कृत सरोवर” वेब पेज ;। ( https://sanskrits.wordpress.com) पर आप सभी दर्शकों का सहृदय स्वागत है। संस्कृतानुरागियों के लिए बृहद विचार विमर्श, प्रश्नोत्तरी, शोध समाधान, इत्यादि अन्य प्रकटीकरण-हेतु यह एक व्यापक क्षेत्र है। अन्यत्र सभी दर्शकों से अनुरोध है की वह अपने विचार अभिव्यक्ति के लिए… मोबाइल नंबर 08294889034, WhatsApp ग्रुप https://chat.whatsapp.com/D8UsJub5BRHAbt5fk2chX7से भी ज्यादा […]

“भारतीय संस्कृत दर्शन के स्रोत”

““भारतीय दर्शन”“ भारतीय दर्शन का आरंभ वेदों से होता है। “वेद” भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, साहित्य आदि सभी के मूल स्त्रोत हैं। आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक कृत्यों के अवसर पर वेद-मंत्रों का गायन होता है। अनेक दर्शन-संप्रदाय वेदों को अपना आधार और प्रमाण मानते हैं। आधुनिक अर्थ में वेदों को हम दर्शन के ग्रंथ […]

त्रैतवाद

“त्रैतवाद” नमस्ते जी, “ईश्वर-जीव-प्रकृति’ सिद्धांत के उद्गाता महर्षि दयानंद” महर्षि दयानन्द ने जब उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वैदिक धर्म का प्रचार आरम्भ किया तो उस समय त्रैतवाद की कहीं चर्चा नहीं होती थी। विद्वत जगत में आचार्य शंकर प्रोक्त अद्वैतवाद प्रतिष्ठित था जो केवल एक ईश्वर की ही सत्ता को मानता है, जीव व […]

“संस्कृत दर्शनों के स्रोत”

“भारतीय दर्शन के स्त्रोत” भारतीय दर्शन का आरंभ वेदों से होता है। “वेद” भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, साहित्य आदि सभी के मूल स्त्रोत हैं। आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक कृत्यों के अवसर पर वेद-मंत्रों का गायन होता है। अनेक दर्शन-संप्रदाय वेदों को अपना आधार और प्रमाण मानते हैं। आधुनिक अर्थ में वेदों को हम दर्शन […]

“अथातो ब्रह्मजिज्ञासा”

“अथातो ब्रह्म जिज्ञासा“ बादरायण व्यास विरचित “ब्रह्मसूत्र“ बादरायण का वक्तव्य ‘’अथातो ब्रह्म जिज्ञासा’’ सर्वाधिक सशक्त वक्तव्य है, जो आज तक किसी ने नहीं दिया है। अब परम की खोज शुरू होती है। यह विश्‍व की सर्वाधिक रहस्यमय किताब है। आज तक जो किताबें लिखी गई उनमें सर्वाधिक महत्‍वूर्ण। मैं उसे विचित्र कहता हूं क्योंकि बादरायण […]

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