सूचनार्थ

नमस्ते जी, “संस्कृत सरोवर” वेब पेज ;। ( https://sanskrits.wordpress.com) पर आप सभी दर्शकों का सहृदय स्वागत है। संस्कृतानुरागियों के लिए बृहद विचार विमर्श, प्रश्नोत्तरी, शोध समाधान, इत्यादि अन्य प्रकटीकरण-हेतु यह एक व्यापक क्षेत्र है। अन्यत्र सभी दर्शकों से अनुरोध है की वह अपने विचार अभिव्यक्ति के लिए… मोबाइल नंबर 08294889034, WhatsApp ग्रुप https://chat.whatsapp.com/D8UsJub5BRHAbt5fk2chX7से भी ज्यादापढ़ना जारी रखें “सूचनार्थ”

संस्कृत व्याकरण के 💯 प्रश्न उत्तर

१०० संस्कृत वैयाकरणस्य प्रश्नोत्तराण (१.) “अष्टाध्यायी” इत्यस्य ग्रन्थस्य रचनाकारः कः ? – पाणिनिः (२.) अष्टाध्याय्यां कति अध्यायाः ? – अष्टौ (३.) अष्टाध्याय्यां कति पादाः ? -३२ (४.) सिद्धान्तकौमुदी इत्यस्य रचयिता क: ? – भट्टोजिदीक्षित:। (५.) बालमनोरमाटीकाया: कर्ता क: ? – वासुदेवदीक्षित:। (६.) तत्त्वबोधिनीव्याख्याया: कर्ता क: ? – श्रीज्ञानेन्द्रसरस्वती । (७.) प्रक्रियाकौमुदी इत्यस्य ग्रन्थस्य कर्त्ता कःपढ़ना जारी रखें “संस्कृत व्याकरण के 💯 प्रश्न उत्तर”

त्रैतवाद

“त्रैतवाद” नमस्ते जी, “ईश्वर-जीव-प्रकृति’ सिद्धांत के उद्गाता महर्षि दयानंद” महर्षि दयानन्द ने जब उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वैदिक धर्म का प्रचार आरम्भ किया तो उस समय त्रैतवाद की कहीं चर्चा नहीं होती थी। विद्वत जगत में आचार्य शंकर प्रोक्त अद्वैतवाद प्रतिष्ठित था जो केवल एक ईश्वर की ही सत्ता को मानता है, जीव वपढ़ना जारी रखें “त्रैतवाद”

“संस्कृत दर्शनों के स्रोत”

“भारतीय दर्शन के स्त्रोत” भारतीय दर्शन का आरंभ वेदों से होता है। “वेद” भारतीय धर्म, दर्शन, संस्कृति, साहित्य आदि सभी के मूल स्त्रोत हैं। आज भी धार्मिक और सांस्कृतिक कृत्यों के अवसर पर वेद-मंत्रों का गायन होता है। अनेक दर्शन-संप्रदाय वेदों को अपना आधार और प्रमाण मानते हैं। आधुनिक अर्थ में वेदों को हम दर्शनपढ़ना जारी रखें ““संस्कृत दर्शनों के स्रोत””

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