सूचनार्थ

नमस्ते जी, “संस्कृत सरोवर” वेब पेज ;। ( https://sanskrits.wordpress.com) पर आप सभी दर्शकों का सहृदय स्वागत है। संस्कृतानुरागियों के लिए बृहद विचार विमर्श, प्रश्नोत्तरी, शोध समाधान, इत्यादि अन्य प्रकटीकरण-हेतु यह एक व्यापक क्षेत्र है। अन्यत्र सभी दर्शकों से अनुरोध है की वह अपने विचार अभिव्यक्ति के लिए… मोबाइल नंबर 08294889034, WhatsApp ग्रुप https://chat.whatsapp.com/D8UsJub5BRHAbt5fk2chX7से भी ज्यादापढ़ना जारी रखें “सूचनार्थ”

भारतीय ज्ञान में नववर्ष पर ऐतिहासिक विमर्श

नमस्ते जी *भारत के मुख्य कैलेण्डर….* *१. स्वायम्भुव मनु (२९१०२ ई.पू.) से-ऋतु वर्ष के अनुसार-विआधुनिक समय में पृथ्वी की आयु कितनी आँकी गयी है?षुव वृत्त के उत्तर और दक्षिण ३-३ पथ १२, २०, २४ अंश पर थे जिनको सूर्य १-१ मास में पार करता था। उत्तर दिशा में ६ तथा दक्षिण दिशा में भी ६पढ़ना जारी रखें “भारतीय ज्ञान में नववर्ष पर ऐतिहासिक विमर्श”

त्रैतवाद

“त्रैतवाद” नमस्ते जी, “ईश्वर-जीव-प्रकृति’ सिद्धांत के उद्गाता महर्षि दयानंद” महर्षि दयानन्द ने जब उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्ध में वैदिक धर्म का प्रचार आरम्भ किया तो उस समय त्रैतवाद की कहीं चर्चा नहीं होती थी। विद्वत जगत में आचार्य शंकर प्रोक्त अद्वैतवाद प्रतिष्ठित था जो केवल एक ईश्वर की ही सत्ता को मानता है, जीव वपढ़ना जारी रखें “त्रैतवाद”

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