आचार्य कात्यायन

आचार्य कात्यायन • वररुचि कात्यायन पाणिनीय सूत्रों के प्रसिद्ध वार्तिककार हैं ।वररुचि कात्यायन के वार्तिक पाणिनीय व्याकरण के लिए अति महत्त्वशील सिद्ध हुए हैं ।इन वार्तिकों के बिना पाणिनीय व्याकरण अधूरा सा रह जाता है ।वार्तिकों के आधार पर ही पतंजलि ने महाभाष्य की रचना की ।कात्यायन विश्वमित्रवंशीय थे ।इनके पिता का नाम सोमदत्त था […]

आचार्य पाणिनि

आचार्य पाणिनि • पाणिनि ( 500 ई . पू . ) आचार्य पाणिनि संस्कृत भाषा के सबसे बड़े वैयाकरण हुए पाणिनि का जन्म ई . पूर्व सप्तमी शताब्दी शालातुरग्राम ( पाकिस्तान के लाहौर नगर के स्थित ) में हुआ । इनकी मृत्यु त्रयोदश्यां तिथि को हुई । इनके प्रमुख ग्रन्थ ” अष्टाध्यायी , लिङ्गानुशासनम् , […]

भीष्म की प्रतिज्ञा

भीष्म की प्रतिज्ञा 〰️〰️🌼〰️〰️ एक पौराणिक एवम रोचक शिक्षाप्रद कथा एक बार हस्तिनापुर के महाराज प्रतीप गंगा के किनारे तपस्या कर रहे थे। उनके रूप-सौन्दर्य से मोहित हो कर देवी गंगा उनकी दाहिनी जाँघ पर आकर बैठ गईं। महाराज यह देख कर आश्चर्य में पड़ गये तब गंगा ने कहा, “हे राजन्! मैं जह्नु ऋषि […]

मन के भ्रमजाल और आत्मज्ञान

व्यवहार में मन, बुद्धि और चित्त का एक सा ही प्रयोग कर देते हैं कई बार, किन्तु तत्व देखें तो बहुत बड़ा भेद है। प्रपञ्चसार तन्त्र के अनुसार मन इंद्रियों की तन्मात्रा के द्वारा विषयों को ग्रहण करता है, उसका काम सङ्कल्प और विकल्प, समर्थन एवं विरोध करना है। जबकि चित्त साक्षी भाव से केवल […]

श्रावण मास का आध्यात्मिक महत्त्व

श्रावण मास का आध्यात्मिक महत्त्व 〰〰🌼〰〰🌼〰〰🌼〰〰 श्रावण अथवा सावन हिंदु पंचांग के अनुसार वर्ष का पाँचवा महीना ईस्वी कलेंडर के जुलाई या अगस्त माह में पड़ता है। इस वर्ष श्रावण मास 17 जुलाई से 15 अगस्त तक रहेगा। इसे वर्षा ऋतु का महीना या ‘पावस ऋतु’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस समय बहुत वर्षा […]

साहित्य और समाज का संबंध

साहित्य और समाज साहित्य समाज का दर्पण है, समाज का प्रतिबिम्ब है, समाज का मार्गदर्शक है तथा समाज का लेखा-जोखा है। किसी भी राष्ट्र या सभ्यता की जानकारी उसके साहित्य से प्राप्त होती है। साहित्य लोकजीवन का अभिन्न अंग है। किसी भी काल के साहित्य से उस समय की परिस्थितियों, जनमानस के रहन-सहन, खान-पान व […]

राजा विक्रमादित्य के नवरत्न

अकबर के नौरत्नों से इतिहास भर दिया, पर महाराजा विक्रमादित्य के नवरत्नों की कोई चर्चा पाठ्यपुस्तकों में नहीं है ! जबकि सत्य यह है कि अकबर को महान सिद्ध करने के लिए महाराजा विक्रमादित्य की नकल करके कुछ धूर्तों ने इतिहास में लिख दिया कि अकबर के भी नौ रत्न थे । राजा विक्रमादित्य के […]

संस्कृत शिक्षण भाग -1

Hello world! Let us try to learn how to use simple words, by using them in simple sentences. संस्कृत भाषा शिक्षणे भवताम् सर्वेषाम हार्दम स्वागतम्। नमो नमः। संस्कृतम् अत्यंतम् सरला भाषा। संस्कृते संभाषणम् इतोपि सरलम्। वयम सर्वे अपि स्वल्पेण प्रयत्नेन नित्य जीवने संस्कृतस्य उपयोगम् कर्त्तुम शक्नुवः। आगच्छन्तु। वयम् एदानीम संस्कृत संभाषणस्य अभ्यासम् कुर्मः। आरम्भे मम […]

अँधविश्वास दूर भगाएं

😊😊पाखंड की पोल खोल😊😊 👉हम बिजली के तार के संपर्क में जिस समय आते हैं, बिजली का करंट हमें उसी समय लगता है। 👉 हम जिस समय अपना हाथ आग में डालते हैं, हमारा हाथ उसी समय जलता है। 👉 हमें जिस समय कोई मारता है, चोट उसी समय लगती है, दर्द उसी समय होता […]

मकर संक्रांति

खगोलीय तथ्य सन 2012 में मकर संक्रांति 15 जनवरी यानी रविवार की थी। राजा हर्षवर्द्धन के समय में यह पर्व 24 दिसम्बर को पड़ा था। मुग़ल बादशाह अकबर के शासन काल में 10 जनवरी को मकर संक्रांति थी। शिवाजी के जीवन काल में यह त्योहार 11 जनवरी को पड़ा था। आखिर ऐसा क्यों? सूर्य के […]

Create your website at WordPress.com
Get started