आखिर क्योँ कहा जाता है भारत वर्ष को “जम्बूदीप” ?

“जम्बूदीप” एक सवाल आपसे ,क्या आप सच में जानते हैं कि हमारे भारत को “”जम्बूदीप”” क्यों कहा जाता है और, इसका मतलब क्या होता है ? दरअसल हमारे लिए यह जानना बहुत ही आवश्यक है कि भारतवर्ष का नाम भारतवर्ष कैसे पड़ा ? क्योंकि एक सामान्य जनधारणा है कि महाभारत एक कुरूवंश में राजा दुष्यंतपढ़ना जारी रखें “आखिर क्योँ कहा जाता है भारत वर्ष को “जम्बूदीप” ?”

सूचनार्थ

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आचार्य कैयट

•आचार्य कैयट पतंजलि के व्याकरण भाष्य की ‘ प्रदीप ‘ नामक टीका के रचयिता हैं । उनके पिता का नाम जैयटोपाध्याय था । अनुमान है कि वे कश्मीर निवासी थे । पीटर्सन ने कश्मीर की एक रिपोर्ट में कैयट को प्रकाशकार मम्मट का भाई और जैयट का पुत्र कहा है । कश्मीरी ब्राह्मण पण्डित केपढ़ना जारी रखें “आचार्य कैयट”

धन्या भारतभूमि:

. देशभक्तिः न यत्र देशोधृतिकामनाऽऽस्ते, न मातृभूमेर्हितचिन्तनं च । न राष्ट्ररक्षा- बलिदानभावः, श्मशानतुल्यं नरजीवनं तत् । । ( कपिलस्य) प्रस्तावना__ निखिले भुवने न कोऽपि नरो यः स्वमातृभूमि स्वदेशं वा न प्रणमति । राष्ट्रियभावनैव सा भावना या मानवं स्वदेशोन्नत्यर्थं प्रेरयति , स्वदेशाभिमानं स्वदेशगौरवं च प्राणेभ्योऽप्यधिकं मन्यते । प्राचीनकालादेव देशभक्तिर्मानवजीवने ओता प्रोता च । ऋग्वेदे – अहंपढ़ना जारी रखें “धन्या भारतभूमि:”

आचार्य जैनेन्द्र

आचार्य जैनेन्द्र • व्याकरण के महान् आचार्य जैनेन्द्र के पिता का नाम माधवभट्ट तथा माता का नाम श्रीदेवी था ।ये कर्नाटक के कोले नामक ग्राम के निवासी थे ।इनका जन्म ब्राह्मण परिवार में विक्रम संवत् 300 के पश्चात् हुआ था ।इनका घर का नाम ‘ देवनन्दि ‘ था ।ये एक दिन अपने घर के बगीचेपढ़ना जारी रखें “आचार्य जैनेन्द्र”

आचार्य नागेश भट्ट

आचार्य नागेश भट्ट (1730–1810) संस्कृत के नव्य वैयाकरणों में सर्वश्रेष्ठ है। ये महाराष्ट्र के ब्राह्मण थे। इनके पिता का नाम शिव भट्ट और माता का नाम सतीदेवी था। साहित्य, धर्मशास्त्र, दर्शन तथा ज्योतिष विषयों में भी इनकी अबाध गति थी। प्रयाग के पास श्रृंगवेरपुर में रामसिंह राजा रहते थे। वहीं इनके आश्रयदाता थे। एक जनप्रवादपढ़ना जारी रखें “आचार्य नागेश भट्ट”

आचार्य भट्टोजिदीक्षित

• आचार्य भट्टोजिदीक्षित का जन्म 1550 ई . वी सन् में और इनकी मृत्यु 1630 ई . वी सन् में हुई थी । आचार्य भट्टोजिदीक्षित के द्वारा प्रतिपादित ग्रन्थ हैं — त्रिस्थली सेतु , अद्वैत कौस्तुभ , वेदभाष्यकार , शब्दकौस्तुभ , सिद्धान्तकौमुदी आदि । इनके पिता का नाम शिवभट्ट और माता का मान सतीदेवी थापढ़ना जारी रखें “आचार्य भट्टोजिदीक्षित”

आचार्य जयादित्य वामनौ

• आचार्य जयादित्य संस्कृत के वैयाकरण थे । ‘ कशिकावृत्ति ‘ ‘आचार्य वामन’ और ‘आचार्य जयादित्य’ ने मिलकर अष्टाध्यायी के ऊपर एक वृत्ति लिखी जिसका नाम है – काशिकावृत्ति । आचार्य हेमचन्द्र ने अपने ‘ शब्दानुशासन ‘ में व्याख्याकार जयादित्य को बहुत ही रुचिपूर्ण ढंग से स्मरण किया है । चीनी यात्री इत्सिंग ने अपनीपढ़ना जारी रखें “आचार्य जयादित्य वामनौ”

आचार्य पतंजलि

आचार्य पतंजलि आचार्य पतंजलि के जन्म और उनके माता – पिता के बारे में अनेक किंवदन्ति हैं ।एक किंवदन्ति के अनुसार पतंजलि के पिता ‘ अंगीरा ‘ इस सृष्टि के निर्माता बा के दस पुत्रों में से एक थे और शिव की पत्नी उनकी माता थी ।इस प्रकार पतंजलि ब्रह्माके पौत्र और त्याग में सर्वश्रेष्ठपढ़ना जारी रखें “आचार्य पतंजलि”

आचार्य भर्तृहरि

आचार्य भर्तृहरि विक्रम संवत् के प्रवर्तक के अग्रज माने जाते हैं । अत : इनका समय कुछ और पूर्व रहा होगा , लेकिन कुछ लोग ई . सन् 57 और कुछ लोग सन् 544 में इनका प्रारम्भ मानते हैं । भर्तृहरि उज्जयिनी के राजा थे । ये विक्रमादित्य उपाधि धारण करने वाला चन्द्रगुप्त द्वितीय केपढ़ना जारी रखें “आचार्य भर्तृहरि”

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