आचार्य भट्टोजिदीक्षित

आचार्य भट्टोजिदीक्षित का जन्म 1550 ई . वी सन् में और इनकी मृत्यु 1630 ई . वी सन् में हुई थी ।

आचार्य भट्टोजिदीक्षित के द्वारा प्रतिपादित ग्रन्थ हैं — त्रिस्थली सेतु , अद्वैत कौस्तुभ , वेदभाष्यकार , शब्दकौस्तुभ , सिद्धान्तकौमुदी आदि । इनके पिता का नाम शिवभट्ट और माता का मान सतीदेवी था । भट्टोजिदीक्षित 27वीं शताब्दी में उत्पन्न , संस्कृत वैयाकरण थे , जिन्होंने ‘ सिद्धान्तकौमुदी ‘ की रचना की । इनका निवास स्थान काशी था ।

पाणिनीय व्याकरण के अध्ययन की प्राचीन परिपाटी में पाणिनीय सूत्रपाठ के क्रम को आधार माना जाता था । यह क्रम प्रयोगसिद्धि की दृष्टि से कठिन था , क्योंकि एक ही प्रयोग का साधन करने के लिए विभिन्न अध्यायों के सूत्र लगाने पड़ते थे । इस कठिनाई को देखकर ऐसी पद्धति के आविष्कार की अवश्यकता पड़ी , जिसमें प्रयोगविशेष की सिद्धि के लिए आवश्यक सभी सूत्र एक जगह उपलब्ध हों ।

आचार्य भट्टोजिदीक्षित ने ‘ प्रक्रियाकौमुदी ‘ के आधार पर ‘ सिद्धान्तकौमुदी ‘ की रचना की । इस ग्रन्थ पर उन्होंने स्वयं ‘ प्रौढ़मनोरमा ‘ टीका लिखी । पाणिनीय सूत्रों पर ‘ अष्टाध्यायी ‘ क्रम से एक अपूर्ण व्याख्या , ‘ शब्दकौतुभ ‘ तथा ‘ वैयाकरणभूषण कारिका ‘ भी इनके ग्रन्थ में शामिल है । इनकी ‘ सिद्धान्तकौमुदी ‘ लोकप्रिय ग्रन्थ है ।

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