आचार्य जयादित्य वामनौ

आचार्य जयादित्य संस्कृत के वैयाकरण थे ।

कशिकावृत्ति ‘ ‘आचार्य वामन’ और ‘आचार्य जयादित्य’ ने मिलकर अष्टाध्यायी के ऊपर एक वृत्ति लिखी जिसका नाम है – काशिकावृत्ति

आचार्य हेमचन्द्र ने अपने ‘ शब्दानुशासन ‘ में व्याख्याकार जयादित्य को बहुत ही रुचिपूर्ण ढंग से स्मरण किया है । चीनी यात्री इत्सिंग ने अपनी भारत यात्रा के प्रसंग में जयादित्य का प्रभावपूर्ण ढंग से वर्णन किया है ।

आचार्य जयादित्य के जन्म – मरण आदि के वृत्तान्त के विषय में कोई भी परिमार्जित एवं पुष्कल ऐतिहासिक सामग्री नहीं मिलती है । तद्नुसार जयादित्य का देहावसान सं . 718 वि . के आस – पास हुआ होगा ।

जयादित्य ने भारविकृत पद्यांश उद्धृत किया है । इस अनुमानिक तथ्य के आधार पर जयादित्य का सं . 650 – 700 वि . तक के मध्य अवस्थित होना माना जा सकता है ।

चीनी आदि विदेशी साहित्य में बहुत दिनों तक भारतीय साहित्य का अनुवाद होता रहा है । बहुत सा भारतीय साहित्य अनुवादरूप से विदेशी साहित्य में पाया गया है , लेकिन उसका मूल ग्रन्थ भारत से लुप्त है । इस स्थिति में यदि विदेशी अनुवाद साहित्य की गंभीर गवेषणा की जाए तो जयादित्य के बारे में प्रामाणिक जानकारी मिल जाएगी ।

एक उत्तर दें

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  बदले )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  बदले )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  बदले )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  बदले )

Connecting to %s